कोरियाई प्रायद्वीप के पास अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र के ऊपर इस सप्ताह अमेरिका और चीन के लड़ाकू विमानों का आमना-सामना होने से तनाव की स्थिति बन गई है। दोनों वैश्विक महाशक्तियों के बीच इस क्षेत्र में इस तरह का हवाई टकराव बेहद दुर्लभ माना जाता है। योनहाप न्यूज की रिपोर्ट के मुताबिक, बुधवार को लगभग 10 अमेरिकी लड़ाकू विमानों ने प्योंगटेक एयरबेस से उड़ान भरकर दक्षिण कोरिया के पश्चिमी तट से दूर अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में सैन्य अभ्यास किया। हालांकि इन अमेरिकी विमानों ने चीन के वायु रक्षा पहचान क्षेत्र (ADIZ) में प्रवेश नहीं किया था, लेकिन जैसे ही वे इस क्षेत्र के करीब पहुंचे, बीजिंग ने तुरंत सतर्क होते हुए जवाब में अपने लड़ाकू विमान उनके पीछे लगा दिए।
क्या होता है वायु रक्षा पहचान क्षेत्र (ADIZ)
वायु रक्षा पहचान क्षेत्र (एडीआईजेड) किसी भी देश के संप्रभु और मुख्य हवाई क्षेत्र से अलग होता है। यह वह बाहरी सुरक्षा घेरा होता है जहां किसी भी देश की सीमा के करीब आने वाले विदेशी या अज्ञात विमानों से अपनी पहचान स्पष्ट करने की अपेक्षा की जाती है, ताकि देश की सुरक्षा को किसी भी संभावित खतरे से बचाया जा सके।
चीनी सेना ने शुरू की निगरानी, अमेरिका ने साधी चुप्पी
इस पूरी घटना पर चीन के सरकार समर्थित अखबार ‘ग्लोबल टाइम्स’ ने अज्ञात सूत्रों के हवाले से बताया है कि चीनी पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) ने कानूनों और नियमों के अनुसार काम किया है। चीनी सेना ने पूरी प्रक्रिया के दौरान गतिविधियों की निगरानी करने और प्रभावी ढंग से प्रतिक्रिया देने के लिए अपनी नौसेना और वायु सेना को तैनात किया था। वहीं दूसरी तरफ, दक्षिण कोरिया में तैनात लगभग 28,500 अमेरिकी सैनिकों की कमान संभालने वाले ‘यूएस फोर्सेज कोरिया’ ने इस मसले पर तुरंत कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है।
दक्षिण कोरियाई सेना को नहीं थी अभ्यास की जानकारी
दक्षिण कोरिया के रक्षा मंत्रालय ने अमेरिकी सैन्य अभियानों की पुष्टि करने में असमर्थता जताते हुए केवल इतना कहा है कि यूएस फोर्सेज कोरिया हमारी सेना के साथ एक मजबूत संयुक्त रक्षा प्रणाली बनाए हुए है। रिपोर्ट के अनुसार, दक्षिण कोरियाई सेना इस हालिया अभ्यास में बिल्कुल भी शामिल नहीं थी और न ही उसे उड़ान के विवरण की पहले से कोई जानकारी दी गई थी। बिना सियोल की भागीदारी के चीन के एडीआईजेड के इतने करीब अमेरिकी लड़ाकू विमानों का इस तरह का प्रशिक्षण करना कूटनीतिक रूप से एक असामान्य बात मानी जा रही है।
