केरलम के सबरीमाला मंदिर में महिलाओं को एंट्री देने का आदेश जारी रहे या नहीं, सुप्रीम कोर्ट की 9 जजों की संविधान पीठ आज से इस पर सुनवाई कर रही है।
वकील इस बात पर बहस कर रहे हैं कि क्या यह मामला सबरीमाला केस की समीक्षा पर सुनवाई का है, या फिर यह केवल रेफर किए गए 7 सवालों के जवाब देने तक ही सीमित रहेगा।
जस्टिस नागरत्ना ने कहा- अगर कोई सामाजिक बुराई है, जिसे धार्मिक प्रथा का नाम दे दिया गया हो तो अदालत उनके बीच फर्क कर सकती है कि वह एक सामाजिक बुराई है या कोई अनिवार्य धार्मिक प्रथा है।
इस पर केंद्र ने कहा, ‘संवैधानिक दृष्टि से इसका जवाब यह होगा कि इसका समाधान ‘अनुच्छेद 25(2)(b)’ में है, यानी संसद इस पर कानून बना सकती है।’
