इजराइल ने शनिवार सुबह ईरान की राजधानी तेहरान समेत कई शहरों पर बड़ा हमला किया। ईरानी एजेंसियों के मुताबिक, दक्षिणी ईरान के एक स्कूल पर मिसाइल गिरने से 40 छात्राओं की मौत हो गई, जबकि 45 घायल हैं।
अमेरिका और इजराइल ने इसे संयुक्त सैन्य कार्रवाई बताया है। ट्रम्प ने वीडियो जारी कर कहा कि ईरान पर यह हमला उनके नागरिकों की रक्षा के लिए किया गया है।
जवाब में ईरान ने इजराइल पर करीब 400 मिसाइलें दागीं और कतर, कुवैत, बहरीन, सऊदी अरब व UAE में मौजूद अमेरिकी ठिकानों को भी निशाना बनाया। इतना ही नहीं, ईरान ने UAE के सबसे ज्यादा आबादी वाले शहर दुबई पर भी हमला किया।
ईरान-अमेरिका के बीच बैलिस्टिक मिसाइल पर विवाद चल रहा था
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान पर हमले की धमकी दी थी। अमेरिकी सेना पहले ही ईरान को चारों तरफ से घेर चुकी है। इससे पहले शुक्रवार को अमेरिका ने अपने नागरिकों से तुरंत इजराइल छोड़ने के लिए कहा था।
ईरान और अमेरिका के बीच चल रही परमाणु समझौते की बातचीत में बैलिस्टिक मिसाइल प्रोजेक्ट सबसे बड़ा विवाद का मुद्दा बन गया है। ईरान इस पर बिल्कुल भी समझौता करने को तैयार नहीं है और इसे अपनी रेड लाइन मानता है।
ईरान का कहना है कि यह उसके बैलिस्टिक मिसाइल प्रोग्राम रक्षा के लिए जरूरी है। ईरान का कहना है कि जून 2025 में इजराइल और अमेरिका ने ईरान के परमाणु साइटों पर हमला किया, तब ईरान की मिसाइलों ने ही उसकी रक्षा की।
ईरानी अधिकारियों ने बार-बार कहा है कि मिसाइल कार्यक्रम पर कोई बात नहीं होगी। यह ईरान की रक्षात्मक क्षमता है और इसे छोड़ना मतलब खुद को कमजोर करना होगा। ईरान कहता है कि बातचीत सिर्फ परमाणु कार्यक्रम तक सीमित रहेगी, मिसाइल या क्षेत्रीय समूहों पर नहीं।
